30 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान परशुराम का जन्मोत्सव, सार्वजनिक अवकाश की मांग..

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रिपोर्टर- अंजली पंत

हल्द्वानी- विप्र एकता महासंघ के द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित की गई संस्था के राष्ट्रीय संयोजक पंडित विशाल शर्मा ने प्रैस को संबोधित करते हुए बताया कि भगवान परशुराम का जन्मोत्सव 30 अप्रैल को धूमधाम से मनाया जाएगा। भगवान परशुराम चौक पर 7:30 बजे से पूजा अर्चना कर 8:00 बजे से विशाल भंडारा का आयोजन किया जाएगा। पंडित विशाल शर्मा ने बताया की सरकार हमेशा से ब्राह्मणों की अनदेखी करती आ रही है निरंतर कई वर्षों से भगवान परशुराम जी के जन्मोत्सव पर सार्वजनिक अवकाश की मांग करते हुए सरकार को कई बार ज्ञापन दिए लेकिन सरकार ने हमेशा इग्नोर किया, इस बार चेतावनी देते हुए पंडित शर्मा ने बताया अगर 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी की विधानसभा चंपावत में जाकर गोल्जू महाराज जी के मंदिर में न्याय की अर्जी लगाएंगे, उसके उपरांत सरकार फिर भी अनदेखी करती है तो मुख्यमंत्री आवास देहरादून में जाकर सैकड़ो की संख्या में ब्राह्मण सामूहिक रूप से अपना मुंडन करवाएंगे। सरकार पर आरोप लगाते हुए बताया कि सिर्फ सरकार वोट बैंक के लिए ब्राह्मण को इस्तेमाल करती है। ना तो ब्राह्मणों के पास सक्रिय रूप से राजनीतिक हिस्सेदारी है ना ही आर्थिक आधार पर आरक्षण है। अगर ब्राह्मण को इग्नोर करा गया तो 2027 में ब्राह्मण इसका जवाब देंगे। प्रेस वार्ता में पंडित विनोद पाठक व पंडित तारु तिवारी उपस्थित थे।

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें