शुभम अंडोला बने समाज में मानवता और एकजुटता का ऐसा उदाहरण सचमुच प्रेरणादायी है।

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टोटल 11,75000 आप सब के सहयोग से प्राप्त हुए
दोस्तों,आज यह पोस्ट लिखते समय मेरी आँखें नम हैं। शब्द छोटे पड़ रहे हैं, क्योंकि जो आपने किया है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।

गौलापार हादसे ने एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। उस परिवार का दर्द देखकर मेरा दिल भी रो पड़ा। उस दिन मैंने कोई बड़ी योजना नहीं बनाई थी, बस आप सबसे एक छोटी-सी अपील की थी कि “आइए, किसी के दुख को अपना दुख समझकर उसका हाथ थामें।”

मुझे नहीं पता था कि मेरी इस छोटी-सी पुकार पर आप सभी इतना बड़ा दिल दिखाएँगे।

सबसे पहले मैंने और मेरे परिवार ने ₹2,00,000 की सहायता राशि दी।
मेरे प्रिय मित्र एडवोकेट प्रकाश सनवाल जी ने ₹50,000 का सहयोग दिया।
मेरे मित्र अंकित अग्रवाल जी ने भी ₹50,000 का सहयोग दिया

इसके बाद जो हुआ, वह मेरे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था।

आप सभी के विश्वास, प्रेम और सहयोग से कुल ₹11,75,000 की सहायता उस परिवार तक पहुँची।

₹6,75,000 मेरी मुहिम के माध्यम से परिवार को दिए गए।

₹3,50,000 नकद सहयोग के रूप में जुटे।

₹1,50,000 क्यूआर कोड के माध्यम से आप सभी ने भेजे।

और सबसे भावुक क्षण तब आया, जब हेमंत मेहरा जी ने उस परिवार के एक मासूम बच्चे की 5 वर्षों तक हर महीने ₹3,000 देकर उसकी पढ़ाई का पूरा दायित्व उठाने का संकल्प लिया।

दोस्तों, मैं कोई बड़ा व्यक्ति नहीं हूँ। मैं तो सिर्फ एक माध्यम बना। असली नायक आप सभी हैं, जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के किसी अनजान परिवार को अपना परिवार मान लिया।

पिछले 8–10 वर्षों से मैं निस्वार्थ भाव से समाज सेवा करने का प्रयास कर रहा हूँ। आज आपने जो विश्वास मुझ पर किया, वही मेरे जीवन की सबसे बड़ी कमाई है।

जब किसी माँ की आँखों में उम्मीद लौटती है, जब किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित होता है, तब लगता है कि इंसानियत आज भी ज़िंदा है।

मैं आप सभी के सामने सिर झुकाकर हाथ जोड़कर धन्यवाद करता हूँ।
यह ₹11,75,000 सिर्फ एक राशि नहीं है, बल्कि हजारों धड़कनों का प्यार, विश्वास और इंसानियत का जीवंत प्रमाण है।

ईश्वर से मेरी बस यही प्रार्थना है कि जिस तरह आपने एक टूटे हुए परिवार का हाथ थामा, उसी तरह आपकी हर खुशी में भगवान आपका साथ दें।

आज मुझे इस बात का गर्व नहीं है कि मैंने एक मुहिम चलाई। गर्व इस बात का है कि मेरा समाज आज भी किसी के आँसू देखकर चुप नहीं बैठता।

आप सभी को दिल की गहराइयों से कोटि-कोटि प्रणाम।
आपका विश्वास ही मेरी सबसे बड़ी पूँजी है, और समाज सेवा ही मेरे जीवन का सबसे बड़ा धर्म।🙏🙏🌹🌹

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