शादी में जा रहे परिवार की कार खाई में गिरी, बुजुर्ग महिला सहित दो की मौत

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कोटद्वार : Accident in Kotdwar : नजीबाबाद बुआखाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक कार हादसे की शिकार हो गई। हादसा गुमखाल सतपुली के मध्य कुल्हड़ बैंड पर हुआ। दुर्घटना में एक बुजुर्ग महिला सहित दो की मौत हो गई है। जबकि कार चालक दलवीर सिंह उनका पुत्र सुरजीत सिंह 6 वर्षीय अर्पित वह 4 वर्षीय वामिका घायल है। बताया जा रहा है कि यह परिवार प्रखंड क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम तछवाड़ में आयोजित विवाह समारोह में शामिल होने कोटद्वार से ग्राम तछवाड़ गया हुआ था। दलवीर सिंह का पुत्र अनूप अपनी बाइक में कार के पीछे ही आ रहा था। इस बीच ग्राम बेरगांव के समीप कार अनियंत्रित होकर करीब 500 मीटर गहरे खड्ड में जा गिरी। दुर्घटना में अनूप की पत्नी प्रीति व अनु की नानी की मौत हो गई है। दुर्घटना में घायल दलबीर सिंह सुरजीत सिंह अर्पित वह वामिका को उपचार के लिए हंस चिकित्सालय सतपुली में ले जाया गया है

घायलों का चल रहा ईलाज

दुर्घटना में गंभीर रूप से अन्य घायलों को हंस हॉस्पिटल सतपुली ले जाया गया है। कार करीब 500 मीटर गहरे खड्ड में गिरी है। 

डीएम सख्त, 206 सड़कों के निरीक्षण को अल्टीमेटम

नई टिहरी जिले में सड़कों से संबंधित विभागों की लापरवाही से कभी भी चमोली जैसा हादसा हो सकता है। हैरत की बात है कि यहां 206 सड़कों पर संयुक्त निरीक्षण किए बगैर ही वाहनों का संचालन किया जा रहा है।

डीएम डा. सौरभ गहरवार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को एक महीने में सभी सड़कों के संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। पिछले दिनों चमोली जिले में बिना आरटीओ पास सड़क पर टाटा सूमो वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने से 12 व्यक्तियों की मौत हो गई थी। इस घटना से समूचे राज्य में हड़कंप मच गया था।

सड़क सुरक्षा अभियान के तहत सड़क हादसों में कमी लाने के लिए ‘दैनिक जागरण’ का देशव्यापी जागरूकता अभियान चल रहा है। टिहरी जिले में सड़कों की बदहाल स्थिति पर ‘दैनिक जागरण’ ने खबरें प्रकाशित की थी। सड़कों की बदहाल स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डा. सौरभ गहरवार ने शनिवार को जिले की सड़कों की समीक्षा बैठक बुलाई तो उसमें चौंकाने वाली जानकारी मिली।

जिले में 206 सड़क अभी एआरटीओ से पास नहीं है, जिसके बाद डीएम विभागीय सुस्ती पर काफी नाराज नजर आए और उन्होंने सभी संबंधित विभागों को 31 दिसंबर तक सड़कों के संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए। पीएमजीएसवाइ की करीब 72 सड़कें, लोनिवि की 118 तथा ग्रामीण निर्माण विभाग की करीब 16 सड़कों का संयुक्त निरीक्षण किया जाना है।

उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान किसी भी अधिकारी के अनुपस्थित पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। संबंधित निरीक्षण की प्रत्येक दिन की रिपोर्ट फोटोग्राफ सहित वाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करें।

साथ ही निर्देश दिए कि पालाग्रस्त स्थलों पर नियमानुसार चूने का छिड़काव करें। साथ ही दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों का नियमित निरीक्षण करें। बैठक में सीडीओ मनीष कुमार, एडीएम रामजी शरण शर्मा, डीडीओ सुनील कुमार, अधीक्षण अभियंता लोनिवि एनपी सिंह, सीओ सदर एसपी बलूनी आदि मौजूद रहे।

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें