बिग ब्रेकिंग हरिद्वार‌: हरियाणा की लगभग 90 वर्षीय”दादी” का ‘हर की पौड़ी’ में ‘स्टंट’ करना ‘मित्र पुलिस’ की गले की फांस बना ! जांच के आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा@ पुलिसकर्मियों के खिलाफ करवाई तय ? रोंगटे खड़े कर देने वाली सनसनीखेज खबर :-लाइव

ख़बर शेयर करें

ब्यूरो चीफ अजय अनेजा

हरिद्वार । हरियाणा की 80 वर्षीय दादी का हर की पौड़ी के पुल के ऊपर से छलांग लगाना सनसनी पैदा हो गई ;वही दादी की इस छलांग मित्र पुलिस के गले की फांस बन गई है अब जांच के आदेश हो गए हैं पुलिस के खिलाफ कार्रवाई तय है। विवरण के मुताबिक विश्व धार्मिक नगरी हरिद्वार में हर की पौड़ी के ऊपर पुल में हरियाणा की रहने वाली 80 वर्षीय वृद्धा दादी नेहर की पैड़ी के पुल से ऊपर से एक तैराक की तरह बुजुर्गमहिला ने सीधे गंगा में छलांग लगा दी।

गजब की फुर्ती है दादी में पुल के ऊपर से हर की पौड़ी मैं छलांग लगाते हुए

इसके बाद वृद्धा गंगा से तैरते हुए किनारे पर आ गई। बुजुर्ग महिला का यह हौसला देखकर श्रद्धालुओं के होश उड़ गए और वह दंग रह गए ; दांतो तले उंगली दबा ली की इतनी ऊंचाई से गंगा जी में छलांग लगाना अपने आप में अद्भुत करिश्मा कहा जाएगा लेकिन पुलिस अधिकारियों के माथे पर यह सोच सोच कर बल पड़ रहे हैं कि वृद्धा के इस दुस्साहस के समय पुलिसकर्मी आखिर कहां ड्यूटी दे रहे थे। यदि कोई अनहोनी हो जाती तो मित्र पुलिस कि लोग लापरवाही की आलोचना ही करते। ध्यान देने की बात यह है कि इस 80 वर्षीय वृद्धा दादीको इसकी कोई इजाजतनहीं दी गई थी। न ही उसके साथ को स्टंट विशेषज्ञ था जिसकी देखरेख में यह जानलेवा स्टंट किया गया।आश्चर्य की बात यह है कि हरकी पैड़ी से ऊंचाई से बिना किसी डर भय के गंगा में छलांग लगाने वाली इस बुजुर्ग महिला की उम्र ८० वर्ष से ज्यादा है।

अरे छोरो तुम्हारी दादी तुम से कम नहीं जय गंगा मैया और लगाई छलांग

वृद्धा का इस तरह का स्टंट किसी दुस्साहस से कम नहीं है। इस बुजुर्ग महिला ने इसे गलत साबित कर दिया है। दादी का कहना था कि वह छोरों से कम थोड़ा है? श्रद्धालुओं के मुताबिक बुजुर्ग हरकी पैड़ी पर स्नान कर रही थी। वहां कुछ युवा पुल से गंगा में छलांग लगा रहे थे। उनको देखकर बुजुर्ग को भी अपनी जवानी के दिन याद आ गए और वह जोश में आ गई। बुजुर्ग पुल पर पहुंची और पुल से गंगा के तेज बहाव में छलांग लगा दी।बुजुर्ग महिला धीरे-धीरे तैरकर गंगा से बाहर आ जाती है। किसी ने इस नजारे को अपने मोबाइल में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग हरियाणा के जींद की रहने वाली है। फेसबुक पर वायरल वीडियो में लिखा गया है कि ‘हमारी दादी क्या छोरों से कम है।’वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा है कि बुजुर्ग महिला धीरे-धीरे तैरकर गंगा से बाहर आ जाती है। किसी ने इस नजारे को अपने मोबाइल में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग हरियाणा के जींद की रहने वाली है। फेसबुक पर वायरल वीडियो में लिखा गया है कि ‘हमारी दादी क्या छोरों से कम है।’हरिद्वार में हरकी पैड़ी क्षेत्र के वायरल हो रहे वीडियो को गंभीरता से लेते हुए ‌एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ने जांच बैठा दी है। एसएसपी का कहना है कि यदि जांच में इस मामले में पुलिसकर्मियों की कोई गलती पाई गई तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।इधर मजेदार बात यह है कि सोशल प्लेटफॉर्म पर एक 80 वर्षीय दादी अम्मा को वीडियो सनसनी बना हुआ है। वीडियो देखकर आप अपने दांतों तले उंगली दबा लेंगे। । दादी हरियाणा के जिंद की रहने वाली बताई जा रही हैं। दादी की छलांग और तैराकी देखकर यह तो साफ जाहिर है कि वह इसमें माहिर हैं, इसलिए उन्होंने एक दो बार नहीं बल्कि कई बार गंगा के पुल से छलांग लगाई। उम्र के इस पड़ाव में भी इतना हौसला और इतनी ताकत अपने आप में एक मिसाल कायम करती है। उम्र के इस पड़ाव में जहां बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो जाता है, वहीं पुल से छलांग लगाकर 80 ..वर्षीय दादी हर की पौड़ी की गंगा में तैरती नजर आ रही है। श्रद्धालुओं का कहना था कि यह पुराने देसी घी और खुराक का कमाल है। बरहाल दादी ने एक नया इतिहास रच दिया कि जहां इस उम्र में बुजुर्ग चल भी नहीं पाते वही एक चीते की तरह पुल के ऊपर से छलांग लगाकर तैरकर एक किनारे आ जाना अपने आप में वाकई करिश्मे से कम नहीं है।

Ad Ad Ad Ad

आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें