बड़ी खबर 👉 कोतवाली प्रभारी निरीक्षक दिनेश फर्त्याल के नेतृत्व में अपराधों की रोकथाम हेतु चलाए जा रहे अभियान के तहत 8 वारंटीयो को लालकुआं कोतवाली पुलिस ने भेजा जेल

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अजय अनेजा 👉 एडिटर इन चीफ 👉 लालकुआं 👉 बिंदुखत्ता 👉*कोतवाली लालकुआं पुलिस टीम द्वारा 08 वारंटियों को किया गिरफ्तार*संक्षिप्त विवरण:-*श्री प्रहलाद नारायण मीणा एसएसपी नैनीताल महोदय* के द्वारा समस्त थाना प्रभारियो को अधिक से अधिक निरोधात्मक कार्यवाही तथा वारंट की शत प्रतिशत तमील किये जाने तथा थाना क्षेत्र में अपराधियो व गुण्डा व्यक्तियो के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने हेतु सख्त दिशा निर्देश दिए गए हैं।इसी क्रम में *श्री प्रकाश चन्द्र एसपी सिटी हल्द्वानी के दिशा निर्देशन, में श्रीमती संगीता क्षेत्राधिकारी लालकुआं के पर्यवेक्षण में श्री दिनेश सिंह फर्त्याल प्रभारी निरीक्षक कोतवाली लालकुआं* के नेतृत्व में आपराधिक व वारंटियो के विरुद्ध अधिक से अधिक गिरफ्तारी/ कार्यवाही किये जाने हेतु दिए गए निर्देशों के क्रम में लालकुआं पुलिस टीम द्वारा दि0 04/05-08-24 को माननीय न्यायालय हल्द्वानी व नैनीताल द्वारा जारी वारण्टो में वारण्टीगंणो को उनके मस्कन व अन्य स्थानो से गिरफ्तार किया गया ।

जिन्हे बाद गिरफ्तारी के मा0 न्या0 पेश कराया जा रहा है । वारण्टियों की सूची निम्नवत हैः- 01- विनोद चन्द्र उप्रेती पुत्र कैशव दत्त नि0 दुम्का बंगर बच्ची धर्मा हल्दूचौड़ लालकुआं नैनीताल उम्र- 40 वर्ष संबंधित फो0व0स0 – 3918/22 धारा 138 NI ACT ,02- पवन पाण्डे पुत्र जमुनादत्त पाण्डे नि0 किशनपुर सकुलिया मोटाहल्दू लालकुआं उम्र-30 वर्ष संबंधित फो0व0स0 – 4453/23 धारा 138 NI ACT, 03- जीवन चन्द्र तिवारी पुत्र स्व0 मोतीलाल तिवारी नि0 ग्राम तुलारामपुर मोटाहल्दू लालकुआं उम्र-49 वर्ष संबंधित फो0व0स0 – 1643/20 धारा 420/467/471 IPC, 04- धीरज बिष्ट पुत्र स्व0 जीवन बिष्ट नि0 पाडलीपुर मोटाहल्दू लालकुआं संबंधित CCNO– 6191/20 धारा 188 IPC व 51 बी आपदा प्रबन्धन अधि0, 05- नवीन सक्सैना पुत्र स्व0 हरीश चन्द्र नि0 पार्वतीपुरम कालोनी दुम्काबंगर बच्चीधर्मा हल्दूचौड लालकुआं उम्र-48 वर्ष संबंधित CCNO- 359/22 धारा 323/504/506 IPC तथा 06- देवेन्द्र नैनवाल पुत्र लक्ष्मण नैनवाल नि0 राजीव नगर 1 बिन्दुखत्ता लालकुआं उम्र-24 वर्ष संबंधित CCNO- 7575/19 धारा 504/506 IPC 07- दीपक सिंह रावत पुत्र स्व0 पुष्कर सिंह रावत निवासी पूर्वी घोड़ानाला बिन्दुखत्ता लालकुआँ नैनीताल उम्र-32 वर्ष सम्बन्धित मु0अ0स0- 170/29 व फौ0वा0स0- 39/20 धारा- 8/21 NDPS Act, 08- मुख्तयार अहमद पुत्र जमील अहमद निवासी लाईनपार हाथीखाना लालकुआं जिला नैनीताल सम्बन्धित फौ0वा0सं0 1069/24 धारा 138 एनआईएक्ट *गिरफ्तारी टीम—व0उ0नि0 प्रथम हरेन्द्र सिंह नेगी व0उ0न0 दित्तीय दीपक सिंह विष्ट उ0नि0 गौरव जोशी कानि0 802 नापु0 आनन्द पुरीकानि0 267 नापु0 तरुण मेहताकानि0 432 नापु0 अनिल शर्मा कानि0 831 नापु0 राजेश सिंह कानि0 570 नापु0 गुरमेज सिंह रि0का0 सुनील कुमार

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें