लालकुआ विद्यालयों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता में बच्चों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मनमोहा

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विद्यालयों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता में बच्चो की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मनमोहा

लालकुआं। बिंदुखत्ता में उत्तरायणी कौतिक व मेला समिति के तत्वाधान में आयोजित होने वाले पांच दिवसीय उत्तरायणी कौतिक के तृतीय दिवस पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हरेंद्र सिंह बोरा व कुंदन सिंह मेहता ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, इस दौरान क्षेत्र के 10 स्कूलों के बीच हो रही सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में स्कूली छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया, खो-खो, कबड्डी, बैडमिंटन प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया।
उत्तरायणी कौतिक के तीसरे दिन मकर संक्रांति के अवसर पर उत्तरायणी कौतिक समिति के नेतृत्व में सैकड़ो श्रद्धालुओं ने विशाल शोभायात्रा निकाली जोकि काररोड मुख्य बाजार से उत्तराखंड की संस्कृति की प्रस्तुतियां देते हुए मेला स्थल तक पहुंची, तदोपरांत जनता इंटर कॉलेज, द फाउंडेशन एकेडमी, स्कॉलर्स हेवन स्कूल, सिद्धांत सरस्वती एकेडमी, ग्रीनवुड एकेडमी, मानवता पब्लिक स्कूल, बीड़ी जोशी मेमोरियल पब्लिक स्कूल, माधो सिंह पब्लिक स्कूल, दानू इंटर कॉलेज व आदर्श इंटर कॉलेज के छात्र छात्रात्रों के बीच में सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, उक्त प्रतियोगिताएं 3 दिन की होगी 16 जनवरी को उक्त प्रतियोगिताओं के रिजल्ट घोषित किए जाएंगे और प्रथम, द्वितीय व तृतीय आने वाली टीमों को पुरस्कृत किया जाएगा, प्रतियोगिता के निर्णायक उत्तराखंड की मशहूर कलाकार सीमा रावत व मेडी पंत हैं, उक्त विद्यालयों के बच्चों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में मेला समिति के अध्यक्ष दीप चंद्र जोशी, सचिव प्रेम दानू, नवीन पपोला, प्रभात पाल, देवराज सिंह दानू, विजय सिंह सामंत, शेर सिंह दानू, प्रमोद कॉलोनी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाप सिंह दानू, कै इंद्र सिंह पनेरी, पुष्कर दानू, बीना जोशी, देवेंद्र सिंह बिष्ट, शिवराज सिंह बिष्ट, प्रकाश चंद मिश्रा, चेतन पांडेय, देव सिंह देवली, रणजीत मेहरा, किशन देवली, कमलेश पाठक, विनोद दानू, सागर शर्मा, पवन सनवाल समेत भारी संख्या में उपस्थिति रहे।

उत्तरायणी कौतिक मेले के तृतीय दिवस का विधिवत शुभारंभ करते मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल, विशिष्ट अतिथि हरेंद्र बोरा, कुंदन सिंह मेहता व अन्यविद्यालयों की सांस्कृतिक प्रतियोगिता में दर्शकों का मनमोहा

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें