लालकुआं ब्रेकिंग-किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के जन्मदिन पर लालकुआं में लगा निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर”265 लोगों के स्वास्थ्य की गई जांच” निशुल्क दवाइयां का भी किया गया वितरण”समाजसेवियों ने केक काटकर दी पूर्व विधायक राजेश शुक्ला को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं”कार्यकर्ताओ ने की दीर्घायु की कामना”-(पढ़े पुरी खबर)

ख़बर शेयर करें

लालकुआं मुकेश कुमार- नगर के अम्बेडकर पार्क में किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के जन्मदिन पर युवा जागरण कमेटी एवं बूबू हेल्थ सेंटर की ओर से नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किया गया जिसमें 265 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई ।वही शिविर में पहुंचे गम्भीर बिमारी से ग्रस्त एक मरीज को चिकित्सको ने अधिक गंभीर देखते हुऐ उसे तत्काल बरेली के राममूर्ती अस्पताल को रेफर किया।वही आयोजक मंडल द्वारा श्री शुक्ला का केक काटकर जन्मदिन मनाया साथ ही उनकी लंबी उम्र की कामना की।


बताते चले कि लालकुआं के अंबेडकर पार्क में युवा जागरण कमेटी एवं बूबू हेल्थ सेंटर की ओर से किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला के जन्मदिन पर निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया।वही अंबेडकर पार्क में आयोजित शिविर का शुभांरम किच्छा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला ने किया जहां आयोजक मंडल द्वारा पूर्व विधायक राजेश शुक्ला को अंग वस्त्र भेंट एंव खाटू श्याम जी की प्रतिमा भेंटकर उनके दीर्घायु की कामना की।इस मौके पर आयोजक मंडल द्वारा उनका केक भी काटा गया।

वही आयोजित स्वास्थ्य शिविर में पहुचें सुशीला तिवारी के वरिष्ठ चिकित्सक एच.पी.पटेल,नेत्र चिकत्सक धर्म सिंह अधिकारी,लैब चिकित्सक मनीषा कोहली,नीमा मेर,निशा कोहली ने सभी प्रचार के रोगों की जांच कर दवा मुहैया कराई।वही शिविर में 265 लोगों की निशुल्क जांच की गई जिनको निशुल्क दवाई भी दी गई वही शिविर में पहुंचे गम्भीर बिमारी से ग्रस्त एक मरीज को चिकित्सको ने अधिक गम्भीर देख हुए तत्काल उसे बरेली के राममूर्ती अस्पताल रेफर किया।

इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष लालचन्द्र सिंह,युवा जागरण कमेटी के अध्यक्ष मुकेश कुमार,राजेन्द्र अधिकारी स्वामी बुबु हेल्थ सेटर,विनोद अग्रवाल,नन्दन राम आर्य ,भाजपा अनुसुचित मोर्चा के अध्यक्ष जितेन्द्र नेहरा,प्रकाश कुमार,विकास गुप्ता,मतलीम खांन,भाजपा जिला उपाध्यक्ष ऊधम सिंह नगर राजेश तिवारी,नितिन चरण,सचिन चरण,विशाल गुप्ता,जानू लूथरा,राजीव त्यागी,चंदन जैसवाल,महेंद्र वाल्मीकि,सचिन शर्मा,अमृत पाल रंधावा, भरत मिश्रा, रज्जी कोली,राकेश गुप्ता,राजकुमार गगनेजा,नरेंद्र ठुकराल,प्रवीण तिवारी,अभिजीत पाठक,धर्मराज जैसवाल,हारून मालिक,महेंद्र पाल,संजीव पांडे, सुनील शुक्ला,वीरेंद्र यादव, जिंदू प्रधान,अजय सहनी,सावन सिंह,परमजीत सिंह,संदीप अरोरा,नितिन गुप्ता,जसबीर सिंह उप्पल,आलोक राय,दीपा राय समेत सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित थे। वही कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रिंपी बिष्ट ने किया।

Ad Ad Ad Ad

आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें