लालकुआ काग्रेस प्रत्याशी अस्मिता मिश्रा ने वार्डो का भ्रमण कर जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत कहा जनता का आशीर्वाद मिला तो स्थाई समस्याओं के निराकरण के लिए सदैव तत्पर

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*( मीडिया प्रभारी सानू)*

*( मीडिया प्रभारी सानू) लालकुआं : लालकुआँ नगर पंचायत से कांग्रेस प्रत्याशी डा० अस्मिता मिश्रा ने आज अपने समर्थकों सहित नगर एवं क्षेंत्र में अनेक स्थानों का भ्रमण कर अपने पक्ष में मतदान की अपील की वार्ड न. 2 में जन सम्पर्क के दौरान उन्होंने कहा आप सभी का जो आशीर्वाद मिल रहा है उससे वे अपनी जीत के प्रति आश्वस्त है इस अवसर पर डाक्टर अस्मिता ने मतदाताओं से विकास के प्रति अपना विजन स्पष्ट करते हुए कहा कि जनता का आशीर्वाद प्राप्त होने पर वह ट्रांसपोर्ट नगर, आवासीय कालोनी, महाविद्यालय, भूमि का मालिकाना हक, युवाओं को स्थानीय उद्योगो में रोजगार, नागरिक पार्क निर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार समेत जन-सरोकारों से जुड़े तमाम कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करायेंगे । उन्होंनें कहा कि जनता यदि एक बार सेवा का मौका देती है तो वह लालकुआं नगर पंचायत को राज्य की एक आदर्श नगर पंचायत बनवाने की दिशा में कार्य करना चाहती हैं। इसके लिए शिक्षा स्वास्थ्य, खेल, चिल्ड्रन पार्क, नागरिक पार्क, विद्युत, पेयजल, स्वच्छता, सौन्दर्यीकरण यातायात व परिवहन जैसी जरूरतों से जुड़ी तमाम समस्याओं का स्थाई समाधान सुनिश्चित करने के लिए व्यावहारिक कार्य योजनाएं बनाने का उनका संकल्प है। उन्होंने कहा कि जनता का आशीर्वाद मिला तो वह लालकुआं नगर पंचायत क्षेत्र में विकास का एक ऐसा मॉडल खड़ा करेंगी जो पूरी तरह ईको फ्रेंडली होगा और दूरगामी, स्थाई व सुखद लाभ देने वाला होगा । उन्होंनें आगे कहा कि विकास की प्राथमिकताएं मूलभूत सुविधाओं के साथ-साथ भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय होनी चाहिए और इसको लेकर वह बेहद गम्भीर हैं। नई पीढ़ी के सपनों के अनुरूप कार्य करने की भी आवश्यताएं उनकी प्राथमिकता है उन्होंने कहा भविष्य पर केन्द्रित नीतियां बना कर आगे बढ़ना समय की मांग है जनता का आशीर्वाद मिला तो वे हर दिशा में स्थाई समाधान का प्रयास करेंगी। डाॅ० अस्मिता ने कहा उनका परिवार सदैव नगर के विकास को समर्पित रहा है उनके ससुर जी के चैयरमैन के कार्यकाल की लोकप्रियता आज भी बरकरार है जिस कारण जनता का उन्हें भरपूर आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है। इस दौरान उनके साथ पूर्व चेयरमैन रामबाबू मिश्रा,वरिष्ठ नेता पूरन सिंह रजवार ,नगर अध्यक्ष भुवन पाण्डे, कमलेश यादव, शेखर जोशी,हरीश बिसौती,अनमोल सहित अनेको लोग मौजूद रहे।

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें