लालकुआं ब्रेकिंग-नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स उत्तराखंड की लालकुआं नगर ईकाई का हुआ विस्तार,कई नए सदस्यों ने ली युनियन की सदस्यता” सौपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी-(पढ़े पुरी खबर)

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मुकेश कुमार -लालकुआं कोतवाली स्थित कार्यालय पर आज नैशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स उत्तराखड़ की लालकुआं नगर इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई आयोजित बैठक की अध्यक्षता लालकुआं नगर ईकाई के अध्यक्ष ऐजाज हुसैन द्वारा की गई। जिसमें नगर ईकाई के विस्तार समेत पूर्व में पारित प्रस्तावों पर चर्चा की गई जिसके बाद नगर अध्यक्ष एवं नगर महामंत्री की संस्तुति पर सर्व वरिष्ठ पत्रकार पंकज शर्मा संवाददाता अग्रसर भारत, संजीव कुमार मीणा संवाददाता कलम की चोट,दिनेश कुमार पाण्डे संवाददाता के.के.सी न्यूज चैनल तथा पत्रकार अनुपम मिश्रा,और गौरव गुप्ता को संगठन में जोड़ने का निर्णय लिया गया।


वही बैठक में सर्वसम्मति से सीनियर पत्रकार संजीव कुमार मीणा को कुमायूं मंण्डल कार्यकारणी में एवं दिनेश कुमार पाण्डे को जनपद नैनीताल ईकाई में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिये जाने हेतु प्रस्ताव कुमायूं मंडल के अध्यक्ष एवं नैनीताल जिलाध्यक्ष को प्रेषित किये जाने का निर्णय लिया गया।
इसके अलावा पत्रकार पंकज शर्मा को नगर अध्यक्ष ऐजाज हूसैन एवं महामंत्री मुकेश कुमार की संस्तुति पर लालकुआं नगर इकाई में उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी है। इसके साथ ही अनुपम मिश्रा संवाददाता के.के.सी न्यूज चैनल को भी जिले में प्रतिनिधित्व दिये जाने के लिए जिलाध्यक्ष को प्रस्ताव भेजने पर चर्चा की गयी।


इधर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में एनयूजे-आई के प्रदेश सचिव प्रमोद बमेटा , कुमाऊं मंडल उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह अधिकारी, हल्दूचौड़ इकाई के सदस्य भुवन प्रसाद ने प्रदेश अध्यक्ष की सहमति पर सहभागिता करते हुऐ उक्त प्रस्ताव को संगठन के वरिष्ठ जनों को अवगत कराये जाने की बात कही।
वही बैठक में एनयूजे-आई के प्रदेश सचिव प्रमोद बमेटा, कुमाऊं मंडल के उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह अधिकारी,हल्दूचौड़ ईकाई के कार्यकारिणी सदस्य भुवन प्रसाद ,लालकुआं नगर ईकाई के अध्यक्ष ऐजाज हुसैन, महामंत्री मुकेश कुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जफर अंसारी, गौरव गुप्ता, नंदन राम आर्य, सुनील कुमार,पंकज शर्मा ,संजीव कुमार मीणा ,दिनेश कुमार पाण्डे ,अनुपम मिश्रा समेत कई पत्रकार मौजूद रहे।

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें