लालकुआं ब्रेकिंग–फर्जी इंश्योरेंस के मामले का एक फिर निकाला जींद बाहर”गौला नदी से खनन सामग्री ढोने वाले वाहनों के फर्जी इंश्योरेंस मामले में जल्द और गिरफ्तारी नहीं होने पर उत्तराखंड बेरोजगार संगठन ने दी अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन की चेतावनी-(पढ़े पुरी खबर)

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लालकुआं। मुकेश कुमार– गौला नदी से खनन सामग्री का ढुलान करने वाले डंपर एवं टैक्टर ट्राली का फर्जी इंश्योरेंस करने के मामले में अगस्त 2022 में दर्ज हुए धोखाधड़ी के मुकदमे में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब मामला अब ठंडे बस्ते में पढ़ता दिखाई दे रहा है, जिससे नाराज होकर क्षेत्र के तमाम खनन व्यवसाईयों एवं उत्तराखंड बेरोजगार संगठन के पदाधिकारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। उत्तराखंड बेरोजगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखंडी ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि यदि अविलंब फर्जी इंश्योरेंस मामले में पुलिस प्रशासन ने खनन से जुड़े बड़े रसूख़दारों जिन्होंने अपने चार पहिया वाहनों का स्कूटर एवं मोटरसाइकिल के नाम से फर्जी इंश्योरेंस करा कर सरकार को लाखों रुपए का राजस्व का चूना लगाया हैं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करवाने के लिए कमर कस ली है। उन्होंने कहा कि फंड फर्जी इंश्योरेंस कराने वाले चाहे वह गौला खनन संघर्ष समिति के पदाधिकारी ही क्यों ना हो एवं तमाम रसूखदार खनन माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए ऐसे जालसाजों को बेनकाब किया जाए। इधर गौला खनन संघर्ष समिति के अध्यक्ष रमेश जोशी (ग्राम प्रधान) का कहना है कि पूर्व में जो भी हुआ हो उसे खत्म करते हुए भविष्य में सख्ती करने की आवश्यकता है। वही उक्त जालसाजी के मुकदमे की तफ्तीश कर रहे हल्दूचौड़ पुलिस चौकी प्रभारी सोमेंद्र सिंह ने कहा कि मामले में 2 लोगों की गिरफ्तारी के बाद कई और लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं, जल्द ही उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा, वर्तमान में पुलिस उनके खिलाफ साक्ष्य संकलन की कार्रवाई कर रही है, उन्होंने कहा कि फर्जी इंश्योरेंस मामले में शामिल खनन व्यवसाईयो के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा, भले ही वह गौला संघर्ष समिति का पदाधिकारी ही क्यों ना हो।
विदित रहे कि गौला नदी में लगभग साढे 7 हजार डंपर एवं ट्रैक्टर ट्राली पंजीकृत है, उनमें से कुछ वाहन स्वामियों ने सरकार को लाखों का चूना लगाते हुए खनन वाहन के बजाय स्कूटर या मोटरसाइकिल का इंश्योरेंस करा कर उसे खनन वाहन में फर्जी रूप से दर्शा दिया, इस मामले का खुलासा आरटीआई द्वारा किया गया और मामले में धोखाधड़ी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ, तथा 2 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही मामले में अगली कार्रवाई करते हुए कुछ और वाहन स्वामियों की गिरफ्तारी जल्द की जाएगी। इधर उत्तराखंड बेरोजगार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य आंदोलनकारी प्रकाश उत्तराखंडी ने चेतावनी दी है कि यदि फर्जी इंश्योरेंस कराने वाले रसूखदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो वह लालकुआं तहसील में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर देंगे।

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें