लालकुआं ब्रेकिंग-लालकुआं क्षेत्र में इण्डेन रसोई गैस की भारी किल्लत से उपभोक्ता परेशान”काला बाजारियों की चांदी”जिम्मेदार मौन-(पढ़े पुरी खबर)

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मुकेश कुमार- लालकुआँ में इन दिनों घरेलू रसोई गैस की भारी कमी देखी जा रही है। गैस उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर भरवाने के लिए कई-कई दिन तक इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। बावजूद इसके उन्हें रसोई गैस उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिसके चलते आम उपभोक्ता बेहद परेशान हैं। वहीं दूसरी ओर रसोई गैस सिलेंडरों की अवैध रूप बिक्री करने वाले कालाबाजारियों के पास गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है उनके द्वारा लोगों से 100 से 200 रूपये अधिक लेकर बड़ी आसानी से रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है।


उपभोक्ताओं द्वारा हफ्ते भर पहले सिलेंडर बुक कराने के बावजूद क्षेत्र की इण्डेन गैस एजेंसी उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने में पूरी तरह से विफल साबित हो रही है और उपभोक्ताओं को एक-एक गैस सिलेंडर के लिए कई-कई दिन गैस एजेंसी और उसके वाहनों की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इसके बाद भी उन्हें रसोई गैस नहीं मिल पा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इण्डेन गैस एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से डिलीवरी चार्ज वसूलने के बावजूद लोगों को होम डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध नहीं करवायी जा रही है।
क्षेत्र की इण्डेन गैस एजेंसी की नाकामी अथवा जानबूझकर घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध ना करवाये जाने से क्षेत्र में गैस की कालाबाजारी करने वालों की चांदी कट रही है उनके द्वारा गैस सिलेंडर की निर्धारित कीमत से 100 से 200 रुपये अधिक वसूल कर लोगों को बड़ी आसानी से रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाया जा रहा है। वहीं नगर के अधिकांश व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर खुलेआम घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ठेले, चाय की दुकान, ढाबों, होटलों पर व्यवसायिक गैस सिलेंडर के स्थान पर इस्तेमाल किए जाने का खामियाजा घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।


उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसी कर्मचारियों की मिलीभगत से लालकुआँ के अधिकांश वार्डों समेत लाइन पर संजय नगर, बंगाली कॉलोनी आदि क्षेत्रों में कई जगह खुलेआम घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है और ब्लैक में निर्धारित कीमत से 100 से 200 रुपये अधिक कीमत में धड़ल्ले रसोई गैस सिलेंडरों बेचे जा रहे हैं।
इसके अलावा लालकुआँ में मुख्य बाजार सहित कई स्थानों पर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों से छोटे गैस सिलेंडरों में गैस की रिफलिंग का धन्धा जारी है। जिसके चलते लालकुआँ में कभी भी कोई हादसा घटित हो सकता है लेकिन संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा इस ओर कतई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों की इस बड़ी लापरवाही के चलते लालकुआँ में कभी भी हादसा हो सकता है।
बरहाल इण्डेन गैस एजेंसी लालकुआँ क्षेत्र में इण्डेन गैस उपभोक्ताओं को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही है जबकि गैस की कालाबाजारी करने वालों के पास घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की भरमार है। इसको लेकर इण्डेन गैस उपभोक्ताओं में खासा आक्रोश है।
वहीं ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि रसोई गैस की कालाबाजारी में लिप्त लोगों को आखिर कहां से और कौन घरेलू रसोई गैस के सिलेंडर उपलब्ध करवा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी बिना इण्डेन गैस एजेंसी कर्मचारियों की मिलीभगत के नहीं हो सकती है। उनका आरोप है कि इण्डेन गैस एजेंसी के कुछ कर्मचारी गैस कालाबाजारियों के साथ मिलकर क्षेत्र में घरेलू रसोई गैस का कृतिम अभाव पैदा कर गैस सिलेंडरोंकी कालाबाजारी को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं।

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें