मौसम का तीन तरफ से हमला। पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी। देशभर में बढ़ेगी ठंड। दक्षणी क्षेत्र में बारिश की संभावना

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देशभर में मौसम में बदलाव जारी है. एक तरफ पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी हो रही है तो दक्षिण के राज्यों में बारिश लोगों के लिए आफत बन रही है. मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच दिनों में तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में भारी बारिश की संभावना है. चक्रवाती हवाओं का तमिलनाडु और उसके पास के इलाकों में बना हुआ है.
पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश के उत्तरी राज्यों का मौसम बिगड़ सकता है. मौसम विभाग ने संभावना व्यक्त की है कि हिमालय में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है. इसका असर शुक्रवार यानी आज से देश के उत्तरी राज्यों पर पड़ेगा. आज मैदानी इलाकों में बारिश होने की संभावना बनी हुई है. वहीं, पहाड़ी इलाकों में भी हल्की बारिश के साथ बर्फबारी होने के आसार बन रहे हैं.
पहाड़ी इलाकों पर हो रही बर्फबारी के कारण उत्तर भारत के मैदानी इलाकों के तापमान में गिरावट हो रही है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और बिहार जैसे भारत के कई राज्यों में हल्की सर्दी का एहसास होने लगा है. मौसम विभाग का कहना है कि अब धीरे-धीरे तापमान में और ज्यादा गिरावट देखी जाएगी.
मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार पहाड़ी राज्यों में मौसम का ट्रिपल अटैक देखने को मिलेगा. लोगों को बर्फबारी, बारिश और ठंड का का सामना करना पड़ सकता है. पहाड़ी राज्यों में लोगों की मुश्किलें पहले से ज्यादा बढ़ सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, गिलगित-बाल्टिस्तान, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में आज भी बारिश के साथ बर्फबारी होने की संभावना है.
वहीं, उत्तर और मध्य भारत में 6-7 नवंबर से ठंड बढ़ेगी. 8-9 नबंवर से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, तेलंगाना समेत देश के कई राज्यों में तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी. तमिलनाडु और आसपास के राज्यों में बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती हवाओं का असर देखने को मिल सकता है.
मौसम विभाग (IMD) ने केरल के तीन दक्षिणी जिलों के लिए भी बीते दिन ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया था. ऑरेंज अलर्ट 6 सेमी से 20 सेमी तक बहुत भारी बारिश का संकेत देता है. आज भी पठानमथिट्टा और इडुक्की जिलों में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश (24 घंटों में 12-20 सेंटीमीटर) होने की संभावना है. केरल में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय है और इसका असर केरल और लक्षद्वीप में कुछ इलाकों में दिख रहा है.

दिल्ली-एनसीआर में स्मॉग के कारण हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में बदल गई है. दिल्ली और आस-पास के लोगों ने कई स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत करना शुरू कर दिया है. इसमें सांस लेने में कठिनाई, नाक बहना, गले में खराश, खुजली और आंखों में पानी आना शामिल हैं.

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आईडीबीआई बैंक के प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के विरोध में बैंक कर्मी 36 घंटे की भूख हड़ताल परप्रेस विज्ञप्तिIDBI BANK के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में हल्द्वानी में जोरदार प्रदर्शन2 एवं 3 नवंबर को देशव्यापी दो दिवसीय भूख हड़ताल – सार्वजनिक बैंकिंग, कर्मचारियों के अधिकार एवं संसदीय आश्वासनों की रक्षा का संकल्पस्थान: बुद्धा पार्क, हल्द्वानीदिनांक: 2 नवंबर 2026आज बुद्धा पार्क, हल्द्वानी में United Forum of IDBI Officers & Employees के आह्वान पर IDBI Bank के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर केंद्र सरकार एवं LIC से IDBI Bank की प्रस्तावित बिक्री तत्काल रोकने तथा बैंक के सार्वजनिक क्षेत्र के चरित्र को बनाए रखने की मांग की गई।आंदोलन को मिला व्यापक समर्थनइस आंदोलन को उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता श्री दीपक बलूटिया ने अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया और कर्मचारियों की जायज मांगों का पुरजोर समर्थन किया।इसके साथ ही अन्य प्रमुख बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों—श्री गौरव जोशी (अध्यक्ष, AIBOC), श्री रोहित वर्मा (अध्यक्ष, UFBU) तथा श्री ओम प्रकाश (UFBU) ने भी धरना स्थल पर उपस्थित होकर अपना सक्रिय समर्थन व्यक्त किया।इसी क्रम में AIIDBIOA के महासचिव श्री पीयूष कुमार मौर्य तथा कारिणी सदस्य (GC Member) श्री गगन यादव ने अपने प्रभावशाली संबोधन से प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का उत्साहवर्धन और प्रोत्साहन किया।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि IDBI Bank केवल एक व्यावसायिक बैंक नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की ऐतिहासिक संस्था है। छह दशकों से अधिक समय में इस बैंक ने देश के औद्योगिक विकास, वित्तीय समावेशन और आर्थिक आत्मनिर्भरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।संसद के आश्वासन की अनदेखी क्यों?वर्ष 2003 में तत्कालीन वित्त मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा संसद के दोनों सदनों में IDBI में कम-से-कम 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का आश्वासन दिया गया था। संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की 46वीं रिपोर्ट में भी सरकारी हिस्सेदारी 51% से कम नहीं रखने की सिफारिश की गई थी।आज कर्मचारियों का सवाल है कि संसद में दिए गए इस आश्वासन का क्या हुआ? क्या किसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक वित्तीय संस्थान के भविष्य से जुड़ी इतनी बड़ी प्रतिबद्धता को बिना पर्याप्त संसदीय जवाबदेही के बदला जा सकता है?जब सार्वजनिक संसाधनों से बैंक को पुनर्जीवित किया गया, तो अब निजीकरण क्यों?IDBI Bank ने वित्तीय संकट और RBI के Prompt Corrective Action (PCA) के कठिन दौर का सामना किया। सरकार, LIC और कर्मचारियों के योगदान से बैंक ने अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार किया और लाभप्रदता हासिल की।ऐसे में सवाल उठता है कि जब सार्वजनिक संस्थाओं और कर्मचारियों के त्याग से बैंक पुनः मजबूत हुआ है, तो अब इसका नियंत्रण निजी निवेशकों को सौंपने की आवश्यकता क्या है?निजीकरण केवल कर्मचारियों का नहीं, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता का भी प्रश्न हैनिजीकरण के बाद भविष्य में कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन, कल्याणकारी सुविधाओं और सरकारी आरक्षण नीतियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इसके अतिरिक्त बैंक की विशाल परिसंपत्तियों, ग्राहकों की जमा पूंजी और देश की बैंकिंग व्यवस्था पर निजी एवं विदेशी नियंत्रण के संभावित प्रभावों पर भी पारदर्शी जवाब आवश्यक है।संविधान के अनुच्छेद 14, 38 और 39 की भावना के अनुरूप सरकारी निर्णयों में निष्पक्षता, सामाजिक-आर्थिक न्याय और सार्वजनिक हित सुनिश्चित किया जाना चाहिए।यूनियन की पांच प्रमुख मांगें